गीत/नवगीत

कितना कठिन है यह जीवन

कितना कठिन यही है जीवन, कांटों भरा बिछौना है।
संघर्ष कहो,कहो साधना, नहीं चैन से सोना है।
करें सदा ही जीवन में कुछ,सार्थक हो जीवन अपना।
हिम्मत के ही बल हमको है,पूरा करना है यह सपना।
दुख सुख आते जाते रहते, नहीं कभी भी डरना है।
संकट चाहे कैसा भी हो, हम को आगे बढ़ना है।
चार दिनों का है यह जीवन, समय नहीं अब खोना है।
कितना कठिन यही है जीवन, कांटों भरा बिछौना है।
कभी कहीं है धोखा खाता, नफरत अपनों की झेले।
मान अपमान कहीं मिले हैं, किस्मत के सब हैं मेले।
कोर्ट कचहरी के चक्कर या,व्याधि लिए दरदर भटके।
अपना साथी कौन बने तब, कहीं जान सूली लटके।
धैर्य और विश्वास ही रखना, नहीं मुसीबत में रोना है।
कितना कठिन यही है जीवन, कांटों भरा बिछौना है।
लेख लिखे जैसे हैं तेरे, वैसा ही यह फल मिलता।
कर्म किये जो जग में अच्छे, फूल ज़िंदगी का खिलता।
दीन दुखी की सेवा कर लो, यही धर्म कहलाता है।
कर्म करे जो पावन जग में, मीठा फल वह पाता है।
वैसा काटोगे जीवन में, जैसा तुम ने बोना है।
कितना कठिन यही है जीवन, कांटों भरा बिछौना है।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995