राजनीति

एहसानमंद लोग इन्हें कहते हैं

“पोलैंड: वारसॉ में एक स्मारक और “गुड महाराजा स्क्वायर” (Square of the Good Maharaja) है, जो महाराजा को समर्पित है। उन्हें पोलैंड में “अच्छा महाराजा” (Good Maharaja) के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैकड़ों पोलिश बच्चों को शरण दी थी।
इज़राइल: हाल ही में नवंबर 2025 में, दक्षिणी इज़राइल के मोशाव नेवातिम (Moshav Nevatim) में भी महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया है। यह प्रतिमा पोलिश यहूदी बच्चों सहित लगभग 1,000 पोलिश बच्चों को बचाने के उनके मानवीय प्रयासों के सम्मान में स्थापित की गई थी।”

ये दोनों देश में महाराज की तस्वीर या प्रतिमा होना,महाराजा ने उन्हे मुश्किल समय में मदद की थी उसके बदले में मान दे कर कृतघ्नता जाहिर की हैं।महाराजा ने अपनी दरियादिली का परिचय दिया ,उन्हे आसरा देकर, लेकिन उन्हों ने उनकी पीढियों को स्मरण रहे इस लिये स्मारक बनाया।
ये द्वितीय विश्व युद्ध के समय की बात हैं।जो दो सितंबर 1939 के दिन जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया तब से शुरु हुआ जो,2 सितंबर 1945 तक चला,उसके परिणाम भी वो ही आयें जो युद्ध के पश्चात आते हैं।लेकिन यहां कुछ और ही बात पर बात करेंगे,वह हैं 1970-71 में हुए पश्चिम पाकिस्तान से अलग हो पूर्व पाकिस्तान से बांग्लादेश बना । मुक्ति वाहिनी ने भारतीय सैन्य की मदद ले कर आज़ादी पाई या कह सकते हैं भारतीय सैन्य ने आज़ादी दिलवाई। 3900 सैनिको की क्षति हुई और 11000 सैनिक घायल हुए तब जा कर पश्चिम पाकिस्तान की तानाशाही और ज़ुल्म ओ सितम से निज़ात मिली ।जो सितम औरतों पर हुए वे अमानवीय थे,जिसके बारे सब को ग्यार हैं खुद बांग्लादेश भूल चुका हैं।भूल चुका हैं कि उन्ही के दादा परदादाओं भारत में शरणागति मांगी थी जिनकी वजह से हम भारतीयों ने शरणागत टेक्स भरा था क्योंकि शरण में आये पूर्व पाकिस्तानियों को खाना मिल सके ।और आज वही बांग्लादेशी पूर्व पाकिस्तानी बन हिंदुओं जुल्म कर रहे हैं,मंदिर तोड आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं,बहु बेटियों की ईज्जत तार तार कर रहें हैं,जिंदा जलाकर खुद को असुरों के वंशज साबित कर रहे हैं।
कोई तुलना हैं ईनकी यहुदी लोगों से जिनको आसरा मिला तो कभी नहीं भूलें ,इनको तो आजादी मिली जुल्मों जिस देश की वजह से,उन्ही के पूर्वजो ने नमक खाया जिस देश का उसी के साथ नमक हरामी? वैसे ही तूर्कि ने किया ,भूकंप की वजह बर्बाद हुआ जा रहा था तब सब से पहले मदद पहुंचाने वाले देश के सामने ओप सिंदुर में दुश्मन देश को अस्ला भेज सैनिक कर्यवाही में मदद की।थोड़ा-बहुत सोच लेने वाले लोगों को भी कुछ तो फोल्ट लाईन नज़र आ ही जायेगी।खुदा ञाने वे खुद कब समझेंगे।

— जयश्री बिर्मि

जयश्री बिर्मी

अहमदाबाद से, निवृत्त उच्च माध्यमिक शिक्षिका। कुछ महीनों से लेखन कार्य शुरू किया हैं।फूड एंड न्यूट्रीशन के बारे में लिखने में ज्यादा महारत है।