मैं सत्य हूँ
झाड़ मिथ्याचार
मैं निर्भीक खड़ा हूँ,
पैर जमाये खड़ा हूँ
अमर हूँ, मैं ब्रह्म हूँ
पल-पल परिवर्तन बीच
मैं अपरिवर्तनशील हूँ
अंतः बाह्य एक हूँ
सह आक्रमणता का प्रहार
पुष्ट और दृढ़ होता हूँ
गर्व है मुझे अपने शब्दों पर
मैं सत्य हूँ।
— अनीता पंडा ‘अन्वी’
