नई-नई आँखों की शरारतें
सुबह की पलकें
ओस में भीगी हँसी
खामोश उजाला
नव दृष्टि जागे
नील गगन की गोद में
स्वप्न मुस्काएँ
काँच सी आँखें
सच का भार सह लें
झिलमिल विश्वास
पलकों की छाया
डर को सिखाए धैर्य
आशा का दीप
नज़रें सीखें
दूसरे की पीड़ा
मन का पुल बने
शरारत हँसे
पर करुणा ठहरे
मानव का अर्थ
— डॉ. अशोक
