लघुकथा

जागृति

“हैलो पापा!”
“सुधीर! क्या हुआ? अचानक आधी रात को वीडियो काल कर रहे हो। सब ठीक तो है?”
“नहीं पापा, मेरा ग्रीन कार्ड मुश्किल में है। पता नहीं क्या होगा?”
” क्या..? कितना समझाया था तुम्हें कि यू. एस. मत जाओ। योग्यता है तो अपने देश में ही काम मिल जायेगा पर मेरी सुनता ही कौन है?”
“आपको पता है न कि मैंने यहाँ आने के लिए कितनी मेहनत की थी।”
“हाँ मालूम है और मैंने अपने प्रोविडेन्ट फंड की आहुति दी थी। तुम्हें तो बेहतर लाइफस्टाइल, वेतन और स्टेटस की पड़ी थी।”
“पापा! सब ठीक चल रहा था और मेरा बाॅस और टीम भी मेरे काम से खुश थी। वे अक्सर कहते – यू इंडियन आर वेरी हार्डवर्किंग एण्ड इंटेलिजेंट।”
“सुधीर! तुम अपने अधिकारियों से बात करो।”
“मैंने बात की थी। वे कहते हैं कि इसमें वे कोई मदद नहीं कर सकते क्योंकि सरकार बदलने के बाद पॉलिसी बदल गयी है। अब क्या करूँ?”
” तुम्हारे पास अपने देश लौटने के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं है। तुम स्वयं नहीं आओगे तो वे डिपोर्ट कर देंगे।”
“सुधीर! सुधीर! घर नहीं जाना है? यहीं सोने का विचार है,” रोहन ने उसे झकझोरते हुए कहा।
पसीने से लथपथ सुधीर ने कहा,”ओह! यह सपना था। “
“तो तू सचमुच सो रहा था। इधर लैपटाप के स्क्रीन पर देख। लिखा है – योर प्रोजेक्ट इज़ एक्सेप्टेड। बधाई हो।”
“धन्यवाद रोहन! सच में मैं अबतक सो रहा था पर अब जाग गया हूँ। सबसे प्यारि देश हमारा।”

— डाॅ. अनीता पंडा ‘अन्वी’

*डॉ. अनीता पंडा

सीनियर फैलो, आई.सी.एस.एस.आर., दिल्ली, अतिथि प्रवक्ता, मार्टिन लूथर क्रिश्चियन विश्वविद्यालय,शिलांग वरिष्ठ लेखिका एवं कवियत्री। कार्यक्रम का संचालन दूरदर्शन मेघालय एवं आकाशवाणी पूर्वोत्तर सेवा शिलांग C/O M.K.TECH, SAMSUNG CAFÉ, BAWRI MANSSION DHANKHETI, SHILLONG – 793001  MEGHALAYA aneeta.panda@gmail.com