खुबसूरत लम्हें
भोर की पहली धूप
खिड़की से झाँकती
मन को छू जाती है
चाय की भाप में
बीते कल की
मुस्कान तैरती
पत्ते पर ठहरी
ओस की बूँद
क्षण भर में संसार
चलते कदमों संग
सपने भी
धीरे मुस्काते
हर लम्हा कहता है
यही अभी
सबसे सुंदर है
— डॉ. अशोक
भोर की पहली धूप
खिड़की से झाँकती
मन को छू जाती है
चाय की भाप में
बीते कल की
मुस्कान तैरती
पत्ते पर ठहरी
ओस की बूँद
क्षण भर में संसार
चलते कदमों संग
सपने भी
धीरे मुस्काते
हर लम्हा कहता है
यही अभी
सबसे सुंदर है
— डॉ. अशोक