सत्ता सुख
यह आज की राजनीति है
कोई किसी से बंधा नहीं
यहां आदर्श नहीं
सत्ता सुख की दरकार है
यहां जीत के घोड़े पर लगते दांव है
कोई फर्क नहीं पड़ता
घोड़ा दागदार हो
चाहे हो लंगड़ा
यह आज की राजनीति है
कोई किसी से बंधा नहीं
यहां आदर्श नहीं
सत्ता सुख की दरकार है
यहां जीत के घोड़े पर लगते दांव है
कोई फर्क नहीं पड़ता
घोड़ा दागदार हो
चाहे हो लंगड़ा