क्षणिका

लोकतंत्र

हमको इतराज़ नहीं
कोई करे देश पर राज
इतराज़ है तो बस इतना
राज शाही में थे जो राजा महाराजा
देश आज़ाद पर सब खत्म हो गए
इस लोकशाही में पर नये नये राज घराने पैदा हो गए

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020