गीतिका/ग़ज़ल

यूँ ही सही

दिन तेरी याद में ढलता है तो फिर यूँ ही सही
ख़्वाब आँखों में चमकता है तो फिर यूँ ही सही

सबकी नजरें हैं उसी पर मगर इक शख़्स मुझे
बज़्म में चुपके से तकता है तो फिर यूँ ही सही

जाम साक़ी ने भरा ही नहीं मेरा ऐ दोस्त
औरों का भर के छलकता है तो फिर यूँ ही सही

तू न आया कभी ना ख़त कोई क़ासिद लाया
मुंतज़िर कोई तड़पता है तो फिर यूँ ही सही

लोगों की अपनी कहानी है फ़साने ख़ुद के
“गीत” मेरे कोई रचता है तो फिर यूँ ही सही

— प्रियंका अग्निहोत्री “गीत”

प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत'

पुत्री श्रीमती पुष्पा अवस्थी