गीत/नवगीत

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव

लो थम गया चुनाव प्रचार का शोर
और साथ ही जोर-आजमाइश का दौर
‌ आ गये सभी चुनाव परिणाम
लोकतंत्र की ताकत को हमारा प्रणाम।

पन्द्रह -बीस दिन रही खूब गहमागहमी
कुछ मन-मुटाव एवं कुछ गलतफहमी
अब सब आइने की भांति साफ हुआ
भ्रम दूर हुए और आई लफ़्ज़ों में नरमी

नये -नये समीकरण देखने को मिले
पूर्व प्रतिद्वंद्वी तक आपस में गले मिले
सबने चली खूब चतुराई भरी चालें
और सुविधानुसार पैंतरे भी बदले।

अधिकतर मामलों में ऐसे गठजोड़
आशातीत सफलता न कर सके प्राप्त
कुछ को तो निराशा ने धर दबोचा
पर कुछ का जाग गया आत्मविश्वास।

स्वाभाविक है कि कुछ के चेहरे लटके
और कुछ के मुखड़ों की मुस्कान बढ़ी
उन्तीस नगर निगमों की कशमकश में
बृहन्मुंबई पर थी सबकी नजरें गड़ी।

कई छोटे राज्यों से भी अधिक का है
बृहन्मुंबई महानगर पालिका का बजट
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के
बर्चस्व की खातिर था सब उठा-पटक।

कुछ-कुछ नगर निगमों के नतीजे
यदि बेहद चौंकाने वाले थे
तो कुछ के परिणाम थे आशानुकूल
और मन को लुभाने वाले थे।

‌ ‌ अत्यंत महत्वपूर्ण मुकाबलों में
‌ कांटे की स्पर्धा देखने को मिली
प्रत्याशियों ने झोंका सारा दम-खम
और परिणामों ने मचा दी खलबली।

चुनावी दंगल अब समाप्त हुआ
महापौर चुनने की तैयारी है
जोड़ -तोड़ देखने को मिल सकती है
सब लोकतंत्र की बलिहारी है।

‌ जो भी प्रत्याशी जीत कर आए
उन सबको जीत की लख-लख बधाई
जो इस बार दौड़ में पिछड़ गए
मत हारो हौसला जारी रखो लड़ाई।

अब सब मिल विकास का काम करो
जीत पर न कोई भी अभिमान धरो
मिल-जुलकर करो सब वादे पूरे
महाराष्ट्र की प्रगति पर बस ध्यान धरो।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई