उत्सव
एक दिन मौत को आना ही है
यह हकीकत है
फिर क्यों न जिंदगी को हसीन बनाया जाये
थिरक के साथ उसके क़दमों के
गीत गाकर प्रणय के
जश्न मनाया जाये
गूंज हो ठहाकों की
उल्लास ही उल्लास हो चारों तरफ
न हो निराशा का कहीं निशां
बरसे प्यार ही प्यार
धरा हो या हो आसमां
