कविता

होली का हुड़दंग

मची है चारों ओर होली की हुड़दंग,
मस्ती में डूबा है आज हर रंग।
फागुन का मौसम है, दिन भी सुहाना,
मन चाहे बस गाना और मुस्कुराना।
पीकर भांग का मीठा प्याला,
झूम रहा है हर दिल मतवाला।
रंगों की बौछार में सब सराबोर,
गूँज रही है खुशियों की शोर।
ओ प्रिये! इस मधुर समां में,
तू है कहाँ इस रंगीन जहाँ में?
चारों ओर बसंत ने डेरा डाला,
हवा में घुला प्रेम का उजाला।
आ भी जा अब, देर न कर,
रंग दे जीवन प्यार से भर।
ऐसा रंग लगा दे अपने प्रेम का,
जो कभी न उतरे इस नेह का।
जैसे कृष्ण ने राधा को रंगा,
वैसा ही तू मेरे मन में उमंगा।
आकर तू भी रंग दे मेरे मन को,
होली के इस पावन उपवन को।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384