एपस्टीन फाइल
एपस्टीन फाइल कहे, मैं वो दस्तावेज |
जिसमें काले राज का,चश्मदीद हर पेज ||
पहने देखा भौर में,जिनको वस्त्र सफेद |
उनकी काली रात के,खुले घिनौने भेद ||
मासूमों की देह पर,थे नरभक्षी दांत |
जश्न मना कर खा गये,मासूमों की आंत ||
मानवता रोती रही, देख सत्य की लाश |
नैतिकता तो मर गई,जिंदा हैं अय्याश ||
बड़े लोग ये देखिए, जिनके सिर हैं ताज |
मुंह छुपाते फिर रहे,किस सच से ये आज ||
— शालिनी शर्मा
