पतों से हो गई है रिश्तों की उम्र
पतझड़ की हवा,
रिश्तों के रंग उड़े,
साँसें गुम हो गईं।
सूखे पत्तों में,
बीती यादें बिखरी हैं,
हृदय रोता है।
सन्नाटा छाया,
बातें अधूरी रह गईं,
छाँव खो गई।
पतों की सरसराहट,
पुरानी खुशबू याद दिलाए,
दिल को छू जाए।
अंतिम पत्ता भी,
हवा में उड़ चला गया,
शून्य बचा रह गया।
— डॉ. अशोक
