मुक्तक/दोहा

खेलो होली – दोहे

रंगों के त्यौहार में , है गुलाल अनुरोध
होली से डरना मना, सुन नादान अबोध।

होली हँस के खेलना, सिखलाता है प्रीत,
गले लगा के देखिये, रिपु भी होगा मीत।

पानी जीवन दायिनी, बचा नीर अनमोल,
खेलो होली फूल से, बजा ख़ुशी के ढोल।

होली लाती है ख़ुशी, भरती है उत्साह,
दिल से दिल मिलते यहाँ, रंग बढ़ाते चाह।

खुशियों के त्यौहार के, देखे रंग हजार,
नाच रहा है ख़ुशी से, ये दिल धूंवाधार ।

— महेंद्र कुमार वर्मा

महेंद्र कुमार वर्मा

द्वारा जतिन वर्मा E 1---1103 रोहन अभिलाषा लोहेगांव ,वाघोली रोड ,वाघोली वाघेश्वरी मंदिर के पास पुणे [महाराष्ट्र] पिन --412207 मोबाइल नंबर --9893836328