प्रकृति की गोद में ले सुकून
शीतल हवा
पत्तों की सरगम में
मन मुस्काए
नीला गगन
सपनों को देता है
अनंत दिशा
नदी की धुन
बहती हुई कहती
छोड़ो विषाद
हरी घास पर
ओस की बूँदों में
जीवन झिलमिल
चिड़ियों का गान
सुबह की किरणों संग
आशा जगाए
पर्वत शांत
धैर्य का पाठ पढ़ाए
अडिग खड़ा
सूरज की लौ
अंधियारा हर लेती
विश्वास जगाए
साँझ की लाली
थके मन को देती
मधुर विश्राम
— डॉ. अशोक
