मैं जिंदा हूं अभी
वो धूप की किरणें
चेहरे पर गिरती हैं धीरे
दिल में उजाला फैलता
सड़क पर पाँव मेरे
छोटी-छोटी खुशियाँ
हर कदम में उम्मीद
साँसों की हल्की चाल
बिजली की तरह चमकती
मन की गहराई में
बाग़ में फूल खिले
पंखियों का गीत सुना
हर स्वर जीवन कहता
बरसात की बूँदें
जमीं पर नृत्य कर रही
मेरी आत्मा मुस्काती
हवा का झोंका आया
खिड़की खुली खुली
नवीन अनुभव लाया
साँझ की लाली में
सपनों के रंग घुल गए
शांति का आलोक फैला
रात के तारे चमकें
आसमान में अनगिनत
हर एक मेरे लिए
मैं जिंदा हूं अभी
हर पल की कीमत जानकर
खुशियों में जी रहा
— डॉ. अशोक
