कविता

खुदगर्ज

फाड़ कर फेंकनी है मुझे
अपने अतीत का हर पन्ना
और शुरू करना है मुझे
अपने जीवन का नया अध्याय,
जिसका नाम होगा मै और केवल मै

ना किसी से अधिक लगाव
ना किसी से कोई बहस
अब ना रहेगी किसी से कोई उम्मीद
सही और गलत के बहाने नहीं

ले लिया है मैंने फैसला
फालतू और मतलबी लोगों के लिए
जीवन को अब खर्च करना नहीं
मतलबी लोगों से नहीं रखना ब कोई रिश्ता
कोई झूठा दिखावा नहीं
अब किसी पर भरोसा करना नहीं,
जीना है अब सिर्फ अपने लिए
अपने दिल की सुनना है
और खुद के लिए बनना है थोड़ा सा खुदगर्ज।

मंजिल को पाने के लिए
भविष्य को गढ़ने के लिए
होना पड़ता है स्त्रियों को
थोड़ा सा खुदगर्ज़ !

— रीना कुमारी

रीना कुमारी

प्लॉट संख्या 161, फ़र्स्ट फ्लोर, ज्ञान खंड 3 इंदिरापुरम, गाजियाबाद मोबाइल नंबर 9555701118 ईमेल reena.kinjal@gmail.com