छोटी सी रेत की पहाड़ी
छोटी सी रेत की पहाड़ी,
ऊपर नीला-नीला गगन।
नन्हा मुन्ना चढ़ता जाए,
मन में लेकर ढेरों सपन।
ताऊ-पापा खड़े दूर कहीं,
देख रहे मुस्कान लिए।
बेटा सीखे कदम बढ़ाना,
हिम्मत अपने प्राण लिए।
रेत उड़े तो क्या डरना,
पांव धँसे तो क्या बात।
गिरकर फिर से उठना सीखो,
यही तो जीवन की सौगात।
छोटे हाथों में बड़ी उमंग,
आँखों में है नया जहान।
छोटी सी पहाड़ी पर खड़ा,
बनता अपना आसमान।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
