गीत/नवगीत

आओ इस होली में कुछ ऐसा कर जाएं

आई रे आई रे होली झूमें नाचें गायें
प्यार से मिलकर एक दूजे को गले लगाएं
मन का मैल निकालें सारा मन उजला कर जाएं
होली के बहाने अपने मन को न भरमाएं

गुलाल की तरह सभी खिलें और मुस्कुराएं
खुद भी हसें और दूसरों को भी हंसाएं
दिलों में जो सुलग रही है चिंगारी सबके
हवा न दें उसको शोला बनाने से पहले ही बुझाएं

सारे रंग मिल कर एक हो जाएं
एक बन जाएं अलग अलग नज़र न आएं
मज़हब जात पात न देखें किसी की
बस प्यार के रंग में सब रंग जाएं

जीवन भर न उतरे चढ़े ऐसा प्यार का रंग
बदल जाये सबका नज़रिया सबके जीने का ढंग
आपसी भाईचारा अमनोचैन हो हर जगह
इस होली में चढ़ जाए सब पर ऐसा रंग

हर किसी के आंसू खुशियों में बदल जाएं
एक दूसरे के लिए हम कुछ ऐसा कर पाएं
दुख दर्द दूसरों का हम अपना बनाएं
आओ इस होली में कुछ ऐसा कर जाएं

— रवींद्र कुमार शर्मा

*रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं जिला बिलासपुर हि प्र