आर्थिक विकास बनाम वैश्विक अनिश्चितता : क्या भारत स्थिर विकास का द्वीप है?
विश्व अर्थव्यवस्था एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ी है जहां अनिश्चितताओं की परतें एक के ऊपर एक जमा होती जा रही हैं। अमेरिकी शुल्क युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष की निरंतरता, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और चीन की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक कमजोरियां मिलकर वैश्विक विकास की गति को अवरुद्ध कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत एक विलक्षण अपवाद की तरह खड़ा है। 27 फरवरी 2026 को भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नई जीडीपी श्रृंखला जारी की जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर को 7.6 प्रतिशत और नॉमिनल जीडीपी वृद्धि को 8.6 प्रतिशत आंका गया। यह अनुमान पूर्व के 7.4 प्रतिशत से ऊंचा है और भारत को लगातार चौथे वर्ष विश्व की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है।
नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 8.4 प्रतिशत और तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने 27 फरवरी को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चौथी तिमाही में 7.3 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि अपेक्षित है और अर्थव्यवस्था में इतनी गति है कि यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। सेवा क्षेत्र ने तीसरी तिमाही में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में दोहरे अंकों की वृद्धि देखी गई। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजुमदार ने विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन को भी रेखांकित किया।
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी फरवरी 2026 की रिपोर्ट में 2025 में भारत की जीडीपी 7.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया और 2026 के लिए 6.9 प्रतिशत तथा 2027 के लिए 6.8 प्रतिशत वृद्धि का पूर्वानुमान दिया, जो सर्वसम्मत अनुमानों से अधिक है। आईएमएफ के जनवरी 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट के अनुसार भारत की 2026 में प्रक्षेपित वास्तविक जीडीपी विकास दर 6.4 प्रतिशत है। अमेरिका-भारत व्यापार मोर्चे पर फरवरी 2026 की शुरुआत में एक व्यापार समझौते की घोषणा हुई जिसमें भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया, जो अन्य एशियाई देशों के 15-19 प्रतिशत की सीमा में आ गया। गोल्डमैन सैक्स के मुख्य भारत अर्थशास्त्री संतनु सेनगुप्ता के अनुसार 2026 में वास्तविक निजी उपभोग वृद्धि 7.7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार भारत का कुल निर्यात वस्तु और सेवाओं सहित वित्त वर्ष 2025 में 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो 2023-24 के 778.1 अरब डॉलर से 6.01 प्रतिशत अधिक है। सेवा निर्यात ने 387.5 अरब डॉलर का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ, जो 13.6 प्रतिशत की वृद्धि है। जीडीपी में अंतिम निजी उपभोग व्यय की हिस्सेदारी 2025-26 में 61.5 प्रतिशत तक पहुंची। बैंकिंग क्षेत्र के सकल एनपीए बहु-दशक के निम्नतम स्तर 2.2 प्रतिशत पर आ गए। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2025 से 125 आधार अंकों की संचयी दर कटौती की और एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की रेटिंग ‘बीबीबी-‘ से बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दी।
जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ ने 20 वर्षों की वार्ता के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति की घोषणा की। यह समझौता 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करेगा और 2027 की शुरुआत में प्रभावी होने की उम्मीद है। भारत ने 2025 में यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ भी व्यापार समझौते किए। केयरएज ग्लोबल ने भारत को ‘बीबीबी+’ रेटिंग दी जो भारत की आर्थिक मजबूती की वैश्विक स्वीकृति है। फॉरेक्स भंडार जनवरी 2026 तक 11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम था और बाह्य ऋण का 94 प्रतिशत कवर करता था।
पीएलआई योजनाओं ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। मार्च 2025 में 22,919 करोड़ रुपए की नॉन-सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के लिए पीएलआई योजना मंजूर हुई। अक्टूबर 2025 तक 249 आवेदनों में 1.15 लाख करोड़ रुपए की प्रतिबद्धताएं आई। शेयर बाजार में अप्रैल-दिसंबर 2024 में 259 आईपीओ आए और पूंजी संग्रह 1,53,987 करोड़ रुपए हो गया। वैश्विक आईपीओ बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2024 में 30 प्रतिशत रही, जो 2023 के 17 प्रतिशत से काफी अधिक है।
चुनौतियां भी कम नहीं हैं। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार 2025 की चौथी तिमाही में सोने के बढ़ते आयात और अमेरिकी निर्यात के घटने से चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.8 प्रतिशत तक पहुंचा। 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगभग 19 अरब डॉलर निकाले। 2025 में भारत-पाकिस्तान चार दिवसीय सैन्य संघर्ष ने कुछ समय के लिए अनिश्चितता बढ़ाई। अमेरिकी शुल्क का दीर्घकालिक प्रभाव, कृषि क्षेत्र की धीमी वृद्धि और रोजगार की गुणवत्ता की चुनौती संरचनात्मक कमजोरियां हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
चैथम हाउस की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहा, यहां तक कि जुलाई-सितंबर 2025 में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई जिसका मुख्य कारण बड़ा घरेलू बाजार था। इंडिया इन्फोलाइन की मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 12 तिमाहियों में औसत जीडीपी वृद्धि लगभग 7.3 प्रतिशत रही है और यह स्थिरता किसी चमत्कार की नहीं बल्कि गहरी संरचनात्मक ताकतों की देन है। वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास 6.8-7.2 प्रतिशत अनुमानित है।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि भारत 5 मार्च 2026 तक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में वास्तव में ‘स्थिर विकास का द्वीप’ बना हुआ है। 7.6 प्रतिशत जैसी असाधारण वृद्धि दर के पीछे मजबूत घरेलू मांग, सक्रिय मौद्रिक नीति, राजकोषीय अनुशासन, रिकॉर्ड सेवा निर्यात और रणनीतिक व्यापार विविधीकरण का संयोजन है। भारत की यात्रा अभी पूर्ण नहीं हुई — रोजगार की गुणवत्ता, नवाचार में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण की चुनौतियां शेष हैं। लेकिन इस वैश्विक तूफान में भारत का आर्थिक लचीलापन और गति आज विश्व की नीति-निर्माण चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है।
— पूनम चतुर्वेदी शुक्ला
