राजनीति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वैश्विक दौड़ : एशिया भविष्य का टेक्नोलॉजी केंद्र बनने की दौड़ में

इतिहास में कुछ ऐसे तकनीकी बदलाव आते हैं जो मानव सभ्यता की धुरी को बदल देते हैं। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक ऐसी ही क्रांति की शुरुआत कर रही है जो न केवल अर्थव्यवस्थाओं को बल्कि सत्ता संतुलन और सभ्यतागत ढांचे को भी नए सिरे से परिभाषित करेगी। जनवरी 2025 में चीन की कंपनी डीपसीक ने अपना आर-1 रीजनिंग मॉडल पेश किया जो महज 6 मिलियन डॉलर की लागत से बना था जबकि ओपनएआई के जीपीटी-4 की लागत 100 मिलियन डॉलर से अधिक थी। इस घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में लगभग 1 खरब डॉलर की गिरावट आई — इसे ‘एआई का स्पुतनिक क्षण’ कहा गया। अब मार्च 2026 की शुरुआत में डीपसीक ने एक और बड़ा दांव खेला है। एआई2.वर्क की रिपोर्ट के अनुसार डीपसीक वी4 एक ट्रिलियन-पैरामीटर मल्टीमॉडल एआई मॉडल के रूप में मार्च 2026 के पहले सप्ताह में लॉन्च होने की उम्मीद है — ठीक उसी समय जब चीन की वार्षिक ‘टू सेशन्स’ संसदीय बैठकें शुरू हुईं।

डीपसीक वी4 में कई क्रांतिकारी विशेषताएं हैं। इसमें कुल 1 ट्रिलियन पैरामीटर हैं लेकिन प्रति टोकन केवल 32 अरब पैरामीटर सक्रिय होते हैं, जिससे लागत अत्यंत कम होती है। इसे Huawei और Cambricon चिप्स पर अनुकूलित किया गया है, जो चीन के एनवीडिया पर निर्भरता से मुक्त होने के प्रयास का प्रतीक है। यह मॉडल टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और ऑडियो को एक साथ संभाल सकता है। इसके एपीआई मूल्य 0.10-0.30 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन के बीच होने का अनुमान है जो जीपीटी-5 से 50 गुना सस्ता है। एंथ्रोपिक और ओपनएआई ने डीपसीक पर 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ एक्सचेंज के माध्यम से औद्योगिक स्तर पर डिस्टिलेशन हमले का आरोप लगाया है, जो एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के भू-राजनीतिक आयाम को उजागर करता है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल रैंकिंग के अनुसार भारत अब एआई प्रतिभा, शोध गहराई, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और आर्थिक प्रभाव में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। स्टैनफोर्ड एचएआई के 2025 के एआई इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एआई बाजार 36.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़कर 2030 तक लगभग 1,811.75 अरब डॉलर तक पहुंचेगा। अमेरिका ने 2024 में 40 उल्लेखनीय एआई मॉडल लॉन्च किए जो चीन के 15 और यूरोप के 3 से कहीं अधिक हैं। एआई में निजी निवेश के मामले में अमेरिका ने 2024 में 109.1 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जो चीन के 9.3 अरब डॉलर से 11.7 गुना और यूके के 4.5 अरब डॉलर से 24 गुना अधिक है।

16 से 21 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 वैश्विक एआई इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव बना। यह ब्लेचली पार्क (2023), सियोल (2024) और पेरिस (2025) के बाद इस श्रृंखला का चौथा वैश्विक एआई सम्मेलन था और ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला उच्च-स्तरीय एआई सम्मेलन था। इस पांच दिवसीय आयोजन में 2.5 लाख से अधिक दर्शक, 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मंत्री, 40 से अधिक वैश्विक सीईओ और 100 से अधिक देशों के प्रतिभागी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी को इसका उद्घाटन किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने भी उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

इस शिखर सम्मेलन में भारत के स्टार्टअप सर्वम एआई ने दो महत्त्वपूर्ण स्वदेशी एलएलएम प्रस्तुत किए — सर्वम-30बी जिसमें 16 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित 30 अरब पैरामीटर हैं और यह भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है, और सर्वम-105बी जो मिश्रण-विशेषज्ञ (एमओई) आर्किटेक्चर पर आधारित है और डीपसीक आर1 तथा गूगल जेमिनी फ्लैश को कई बेंचमार्क में पीछे छोड़ता है। एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इस सम्मेलन में भारत के दो सबसे बड़े समूह रिलायंस और अदानी ने मिलकर 210 अरब डॉलर के घरेलू एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का संकल्प लिया। ओपनएआई ने मुंबई आधारित टाटा समूह के साथ साझेदारी की, जबकि एंथ्रोपिक ने इन्फोसिस के साथ समझौता किया और बेंगलुरु में अपना कार्यालय खोला।

टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट के विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति निदेशक याकोब मोकेंडर ने इस सम्मेलन में कहा कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह अच्छा है कि एआई को केवल अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा के रूप में न देखा जाए और भारत ही वह देश है जो सबसे आत्मविश्वास के साथ इस गतिशीलता को अस्वीकार कर रहा है। उसी समय, इस सम्मेलन में भारत ने औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका में प्रवेश किया जो दिसंबर 2025 में अमेरिका द्वारा शुरू किया गया गठबंधन है और महत्त्वपूर्ण खनिजों से लेकर डेटा सेंटर तक एआई आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने का प्रयास करता है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ एआई नीति सलाहकार श्रीराम कृष्णन ने कहा कि अमेरिकी एआई स्टैक को उसके सहयोगियों की नींव होनी चाहिए, जिसकी आलोचना हुई क्योंकि भारत स्वदेशी एआई मॉडल बनाने पर जोर देता है।

भारत की एआई मिशन को 2025-26 के बजट में 240 मिलियन डॉलर मिले जो 2024-25 के 66 मिलियन डॉलर से लगभग चार गुना अधिक है। डीपसीक की सफलता के बाद 30 जनवरी 2025 को भारत सरकार ने स्टार्टअप और उद्यमों को स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के लिए आमंत्रित किया। इंडियाएआई मिशन के तहत 38,000 जीपीयू तैनात किए गए जो पिछले वर्ष के 18,000 से दोगुने हैं। 6 मार्च 2025 को एआईकोषा (AIKosha) डेटासेट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया जो उच्च-गुणवत्ता के गैर-व्यक्तिगत डेटासेट तक पहुंच प्रदान करता है। माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने एनबीसी को बताया कि भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा देखकर यह निष्कर्ष निकलता है कि भारत भी मॉडल विकास का केंद्र बन सकता है और भविष्य में कई ‘डीपसीक क्षणों’ में से कुछ भारत से भी आएंगे।

यूरेशिया रिव्यू में फरवरी 2026 में प्रकाशित एक विस्तृत विश्लेषण में बताया गया कि भारत की एआई रणनीति में 2025 की दूसरी छमाही में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव आया। जुलाई 2025 में भारतजेन प्रकाशित हुआ लेकिन इसके 2 अरब पैरामीटर और तार्किक कमजोरियां स्पष्ट थीं। इस विफलता से सीखकर भारत ने ‘संपूर्ण स्टैक संप्रभुता’ के बजाय ‘बुके ऑफ मॉडल्स’ की रणनीति अपनाई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावोस 2026 में कहा कि 95 प्रतिशत काम 20 अरब या 50 अरब पैरामीटर के मॉडल से हो सकता है, अतः भारत हाइपर-मासिव मॉडल की दौड़ में शामिल नहीं होगा। यह दृष्टिकोण भारत की ‘जुगाड’ नवाचार परंपरा से मेल खाता है — कम लागत में अधिक प्रभाव।

एशिया के व्यापक एआई परिदृश्य में जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान देश भी अपनी-अपनी एआई रणनीतियां विकसित कर रहे हैं। अमेरिका और चीन मिलकर वैश्विक एआई कंप्यूटिंग शक्ति का लगभग 85 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं। भारत का कंप्यूटिंग शेयर अभी भी सीमित है, लेकिन उसका डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर — इंटरनेट कनेक्टिविटी, यूपीआई, आधार — एआई के लोकतांत्रिक परिनियोजन की जमीन तैयार करता है। चीन ने वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का प्रस्ताव रखा है जिसका मुख्यालय शंघाई में होगा और जिससे वह विकासशील देशों के लिए एआई मानक निर्धारण का केंद्र बनना चाहता है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत अपने ‘सात चक्र’ ढांचे के माध्यम से एआई शासन को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास कर रहा है।

5 मार्च 2026 तक की स्थिति में एशिया का एआई परिदृश्य निर्णायक मोड़ पर है। डीपसीक वी4 के संभावित प्रक्षेपण, सर्वम के स्वदेशी मॉडल, इंडिया एआई समिट की उपलब्धियां और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते एआई तनाव — ये सब मिलकर एक बहुध्रुवीय एआई विश्व की रूपरेखा बना रहे हैं। भारत का ‘तीसरा मार्ग’ केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि नियम-निर्माता बनने का है। 280 अरब डॉलर के अनुमानित एआई-संचालित प्रौद्योगिकी राजस्व के साथ भारत यह साबित करने की कोशिश में है कि वैश्विक एआई नेतृत्व केवल सबसे बड़े मॉडल बनाने से नहीं, बल्कि सबसे प्रासंगिक, समावेशी और टिकाऊ एआई समाधान देने से आता है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563