जल की गुहार हमें दूषित होने से बचा लो
प्राचीन समय में माँ नर्मदा में मछलियों को पुण्य कार्य हेतु उन्हें आहार दिया जाता था। उसके बाद कई मछलियों को सोने की नथ पहना कर वापस नर्मदा के जल में छोड़ दिया जाता था।कर्नाटक के दक्षिण कन्नड जिले के शिशिला गांव में भी एक अनोखी परंपरा देखने है, जहां मछलियों की पूजा की जाती है। कपिला नदी में रहने वाली महसीर मछलियों को स्थानीय लोग भगवान का रूप मानते हैं और उन्हें रोज़ भोजन कराया जाता है। शिशिला गांव स्थित शिशिलेश्वर मंदिर इस परंपरा का केंद्र है, जहां भक्त पहले भगवान शिव के दर्शन करते हैं और फिर नदी में मछलियों को खाना खिलाते हैं।
नर्मदा नदी में कई प्रकार की मछलियां पाई जाती है। इनमे से एक टाइगर फिश महाशिर मछली का दर्जा मध्यप्रदेश को प्राप्त है।विभिन्न कारणों से इस टाइगर फिश की बहुत ही कमी नर्मदा नदी में आई है। जो कि चिंता विषय है। मछली जल को साफ़ रखने में अपनी अहम् भूमिका अदा करती आई है उसी सन्दर्भ में बहुत पहले गंगा नदी में डॉल्फिन मछलियाँ छोड़ी थी ताकि गंगा नदी का जल साफ़ हो सके ,कहते गंगा का पानी कभी ख़राब नहीं होता।प्रदूषणकारी संयंत्रों की वजह से रासायनिक पानी एवं अपशिष्ट डालते आने से प्रदूषण बढ़ाता आ रहा है। अब प्रदूषण को बढ़ने ना देवे ताकि धरती निर्मल बनी रह सकें। हमारा मानना है कि जीव – जंतुओं को अपना काम करने दे और हम भी स्वच्छता में अपना हाथ बटाए ,ताकि शुद्ध जल शुद्ध वायु की प्राप्ति हो सकें।
वर्षा के जल को सहेजा जाए उदाहरण के तौर पर परियोजना ,तालाब ,स्टॉपडेम ,निस्तार,का ज्यादा संख्या में निर्माण होवे जिसके निर्मित होने से विषम परिस्थियों में तालाब कुँए, बावड़ी आदि में स्वतः जलस्तर बढ़ जावेगा।साथ ही खेती को सिंचाई हेतु वाटर लेवल बढ़ाने में जल की आपूर्ति को एक नया बल देगा।इनके अलावा व्यर्थ ढुलने वाले पानी पर रोक हेतु पहल की जाना चाहिए।ताकि पानी की समस्याओं का सामना न करना पड़े।जल वितरण दो दिनों और पानी पाउच, बोतलों में ,पानी की टंकियों में लोग खरीद कर पी ही रहे है।यदि पानी को नही सहेजा तो एक दिन पानी की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।पानी सहेजें तो ही हम नदियों के पानी को व्यर्थ समुद्र में बहने से रोककर उसका उपयोग कर पाएंगे। जल ही जीवन की परिभाषा को सही तरीके से समझ पाएंगे।इसके लिए जल संरक्षण ,जल संकल्प के साथ पानी सहेजने के स्रोतों का निर्माण आवश्यक है । सूखे की स्थिति में इन संसाधनों के निर्मित होने सहेजे जल का उपयोग सुविधाजनक होगा।इसके अलावा व्यर्थ ढुलने वाले जल पर रोक हेतु पहल की जाना चाहिए।वाटर हार्वेस्टिंग घरों की छतों पर होना चाहिए ताकि जल की समस्याओं का सामना न करना पड़े।।यदि जल को नही सहेजा तो एक दिन जल की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।
— संजय वर्मा ‘दृष्टि’
