कविता
आज फिर दिल ने उसका नाम बड़ी नर्मी से लिया,
जैसे हवा ने किसी फूल को छूकर गीत गुनगुनाया हो।
वो लड़की… हाँ वही, जिसके बोलने से सुकून उतर आता है,
और जिसकी हँसी से दिल का हर दर्द गायब हो जाता है।
कितनी अजीब बात है —
ना मेरा दिन उसके बिना शुरू होता है,
ना रात उसके ख्यालों के बिना खत्म।
उसकी बातें जैसे कोई मीठी बारिश हों,
जो हर बार मेरे दिल को भीगो देती हैं।
जब वो खुले बालों में आती है,
तो खुद रौशनी भी शर्माने लगती है।
ऐसा लगता है जैसे भगवान ने फुर्सत के लम्हों में उसे बनाया हो,
हर नज़र उसकी तरफ़ जाते-जाते ठहर सी जाती है।
कभी-कभी सोचता हूँ —
क्या उसे भी मेरे दिल की ये बेचैनी महसूस होती होगी?
क्या वो भी मेरी तरह अपने ख्यालों में मेरा नाम दोहराती होगी?
शायद नहीं… या शायद हाँ, कौन जाने…
बस इतना जानता हूँ —
उससे बात करना मेरे लिए प्रार्थना है,
वो सिर्फ़ एक एहसास नहीं,
वो मेरी रूह का सुकून है… मेरा नसीब,
मेरी मोहब्बत है…
— हेमंत सिंह कुशवाह
