ग़ज़ल
न बाक़ी फिर उसकी कहानी रहेगी।
न दरिया में जिस दिन र वानी रहेगी।
हुक़ूमत बदल दो सभी काम होंगे,
नहीं फिर यहाँ लन तरानी रहेगी।
मियां काम जल्दी भलाई के कर लो,
हमेशा नहीं ये जवानी रहेगी।
कहीं भी ज़रा सा न टेंशन रहेगा,
फ़क़त जा के पेंशन उठानी रहेगी।
सभी की जो होगी सफाई की आदत,
फज़़ा फिर सुनहरी सुहानी रहेगी।
किसी को भी होगी न तकलीफ़ ज़्यादा,
रविश जब ज़रा दरमियानी रहेगी।
क़दम दर क़दम हादसे फिर तो होंगे,
नहीं कुछ अगर सावधानी रहेगी।
— हमीद कानपुरी
