विज्ञान

हम वैदिक नव वर्ष क्यों मनाएं

आज वैदिक नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत 2083 अर्थात बृहस्पतिवार, 19 मार्च, 2026 है, आज सृष्टि का मानव वर्ष भी है क्योंकि सृष्टि का निर्माण आज से 1972949928 वर्ष पूर्व हुआ, इसलिए यह नव वर्ष है।

अब एक साधारण मनुष्य के मन में प्रश्न उत्पन्न होता है कि जब अंग्रेजों का नया वर्ष एक जनवरी 2026 था ही, तो वैदिक नव वर्ष क्यों मनाया जाए? इस दिन इतिहास में क्या हुआ था? वैदिक नव वर्ष विश्व में इतना प्रचलित क्यों नहीं है ?

वैदिक नव-वर्ष मनाने के विषय को ‌निम्न प्रकार से अवलोकन विश्लेषण किया जा सकता है।

1 हम एक जनवरी को प्रतिवर्ष क्वेश्चन (Christian) नव वर्ष मनाते हैं, जिसका न कोई आधार है,न इतिहास और न ही वैज्ञानिक रूप से ठीक है। जिस ईसाई नव वर्ष को लगभग पूरा विश्व मनाता है, इसमें कुछ मास 30 दिन के हैं, कुछ 31 दिन के, फरवरी 28 दिन का है, 4 साल बाद 29 दिन का हो जाता है, जुलाई और अगस्त 31 दिन के क्यों हैं, इसका कोई औचित्य नहीं है, अतः वैदिक दिवस मनाना अच्छा होगा।

2 इसी प्रकार मुस्लिम नव वर्ष भी अधिक लोकप्रिय नहीं हुआ,जिसकी शुरुआत 622 ईस्वी में हुई. अब 20 जुलाई से नया हिजरी सन 1445 शुरू होगा. हिजरी एक चंद्र कैलेंडर है जिसमें 354 या 355 दिनों का एक साल होता है. इसमें भी 12 महीने होते हैं लेकिन चूंकि इसे चंद्रमा की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार संयोजित नहीं किया जाता, लिहाजा ये हर साल 10 दिन पीछे खिसक जाता है.

3 आज का दिन ही सृष्टि का प्रथम दिन है, मानव का जन्मोत्सव भी आज का ही है और इसी के अनुसार सृष्टि की गणना की गई है जो पूर्ण रूप से विज्ञानिक है।

4.भगवान रामचंद्र जी का राज्याभिषेक भी आज के दिन ही हुआ इसी प्रकार,सम्राट युधिष्ठिर जी का राज्याभिषेक भी आज के दिन हुआ अतः युधिष्ठिर संवत का प्रारंभ भी आज ही‌ के दिन हुआ ।

5.सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य जी द्वारा वैदेशिक दुष्टों का दमन , शक , हूण का समूल नाश विक्रमादित्य की उपाधि धारण कर विक्रमी संवत का प्रारंभ भी आज के दिन हुआ है अतः विक्रम संवत अधिक वैज्ञानिक है।

6 आर्य समाज का स्थापना दिवस भी आज ही है, बहुत से लोग आज के दिन से ही अपने व्यापार का नववर्ष मनाते हैं।

7 अंग्रेजी नव वर्ष मनाने का औचित्य इसलिए भी नहीं है क्योंकि उस समय प्रकृति से बहुत से रोग हो रहे हैं और इस समय में पत्ते नए-नए आ जाते हैं, जो व्यक्ति बहार निकलने डरते थे खुशी से बाहर निकलना शुरू हो जाते हैं ।

  1. यह आवश्यक हो गया है कि विदेशी नव वर्ष नहीं मनाकर इस वैदिक नव संवत्सर को मनाए और इसे विदेशों की तरह न मनाकर
    सभी अपने धइष्टमित्र एवं परिवारजनों को शुभकामनाएं दे।

निष्कर्ष यह निकलता है कि अपने घरों में वैदिक यज्ञ और शुद्ध गोघृत से दीप प्रज्वलन कर सकल विश्व के कल्याण की कामना करें आज अपना नया साल बनाएं।

— दलीप सिंह एडवोकेट