प्रीत रीत सीखिए
भोर लालिमा प्रभास,
चेतना विभा उजास,
ज्योति रश्मियां प्रकाश,
ओस बूँद भीजिए।।
धर्म कर्म प्रेम सेतु,
धैर्य धार ज्ञान हेतु,
साधु संत दान सार्थ,
बात मान लीजिए।।
आसपास गंदगी न,
जोर शोर कर्ण हो न,
हाथ थाम काम साथ,
ध्यान आप दीजिए।।
धान खेत है उमंग,
पात-पात रास रंग,
सौख्य पुष्प हार गूँथ,
प्रीत रीत सीखिए।।
