आत्मनिर्भरता ही नागरिकों की समस्या का समाधान
आज हम कहां हैं ? और किस दिशा की ओर जा रहे हैं वर्तमान में हर एक देश दूसरे देश का भूगोल बदलने के लिये आसमान से झांकने लगा है, और सागर को सीमाओं में बांधने लगा है अगर किसी देश ने आज कुछ बना लिया है तो सिर्फ मानव और मानवता को ताबाह करने का सामान ही बनाया है, और उसी सामान के बलबूते पर सभी फूले नही समा रहे हैं, जो कुछ भी बना है और जिस मकसद से बना है उसका एक न एक दिन इस्तेमाल होना तय है।
आज हम धीरे-धीरे तृतीय विश्व युद्ध की आगोश में समाते जा रहे हैं, दिन ब दिन युद्ध की बांहे फैल रही हैं और अपनी ओर आकर्षित भी कर रही हैं कुछ देश युद्ध की बांहों में पूरी तरह से समा चुके हैं अब उनको चूर-चूर होना बाकी है, इधर हम अपने देश में लाईन-लाईन का खेल खेल रहे हैं, जब 8 नबंर 2016 को देश की मुद्रा में बदलाव करने के लिये तत्कालीन प्रचलन में शामिल पांच सौ और दो हजार के नोटों को बंद किया गया था उन दिनों देश में कई महीनों तक देश के नागरिक लाईन में खडे़ होकर देश का साथ दिया था हालांकि इस बदलाव के दौरान सभी नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ था किंतु मुद्दा था कालाधन, भ्रष्टाचार व नकली मुद्रा पर लगाम लगाने की लेकिन यह किस हद तक कारगर साबित हुआ इसका उल्लेख कभी विकास कार्यों के साथ नही किया गया। 2019 में कोराना महामारी अपने पूरे शबाब के साथ देश के हर नागरिक के सामने नृत्य करने लगी और अपने साथ साथ सभी को नाच भी नचा दिया था हालात यह थे कि रासन पानी से लेकर आवागमन तक सभी नागरिक लाईन में लगे नजर आये उन दिनों को देखकर इस बात का बड़ी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था कि किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिये देश किस हद तक तैयार है ? इस महामारी में सबसे पहले जनप्रतिनिधि ही मुंह में मुसक्का लगाये क्वारंटीन हो गये और सोसलमीडिया पर महामारी से निपटने के लिये उचित दूरी बनाये रखने व बेवजह घर से न निकलने की अपील करने लगे, धीरे धीरे समय बीतता गया इस दौरान कदमों ने रास्तों की बड़ी- बड़ी दूरियां नाप डाली लॉकडाउन का वह गुजरा समय अपने आप में एक भयानक वक्त था जो बीत गया किंतु अनगिनत निशानियां देशवासियों के हृदय पर छोंड़ गया।
बीते 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इस्रराईल की संयुक्त टीम ने ईरान पर हमला इस वजह से कर दिया कि ईरान भी परमाणु सम्पन्न होने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा था जो अमेरिका को नागवार गुजर रहा था इस हमले में ईरान के नेता अली खामेनेई की मौत हो गई जिसके कारण तकरार इतनी बढ़ गई कि पूरा मार्च 2026 बम और मिशाईलों की आवाजाही में ही बीत गया इस दौरान हजारों नागरिक बेमौत मारे गये। अमेरिका इस्रराईल और ईरान तीन देश युद्ध की जुगलबंदी में जवाबी कार्यवाही कर रहे थे जिसका असर भारत में यह देखने को मिला कि मार्च महीने से ही भारत में रसोंई गैस की किल्लत हो गई जिसके कारण भारत देश के हर प्रदेश में गैस के लिये सभी नागरिक गैस सिलेंडर लेकर लाईन में खड़े नजर आये, कहीं कहीं स्थिति ऐसी भी पाई गई कि गैस वितरण को लेकर आपस में विवाद हो गया जिसके कारण पुलिस प्रशासन को गैस एजेसिंयों पर तैनात किया गया पुलिस के संरक्षण में गैस का वितरण करना पड़ा।
यहां पर गौर करने वाली बात यह कि जब अमेरिका और इस्रराईल की संयुक्त टीम ईरान से युद्ध कर रही है जिसके कारण भारत में महंगाई बढ़ी, गैस की किल्लत हो गई, पूरा देश एक बार फिर गैस एजेंसियों पर लाईन में खड़ा नजर आया हर नागरिक सिलेंडर के लिये इधर उधर भटकने लगा। अब जरा यह सोंचिए! यदि युद्ध की लपटे और तेज हुयीं यदि निकट भविष्य में भारत को भी किसी से सीधे लड़ना पड़ा तो भारत में क्या स्थिति होगी ? जब ईरान की हालत देखकर भारत में जमाखोरी शुरू हो गई महंगाई बढ़ गयी, सभी व्यापारी आपदा में अवसर की तलाश करने लगे जब वास्तव में कभी कोई विपदा भारत में आयेगी तो भारत के भीतर का क्या मंजर होगा। खैर इतनी दूर तक सोचने का वक्त ही कहां सभी को दिया जा रहा है सभी नागरिकों को यू0जी0सी0 जातीय आरक्षरण, और जगह जगह पर होनी वाली रैलियों को सफल बनाने का कार्य शौंप दिया गया है जिसमें सभी नागरिक पूरी तरह से उल्झे नजर आ रहे हैं और अपने देश के प्रधानमंत्री जी 23 मार्च 2026 को देश की संसद से देशवासियों को सम्बोधित करते हैं जिसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र अमर उजाला ने अपने पृष्ठ संख्या 9 पर लंबे समय तक रहेगा संकट का असर, धैर्य व एक जुटता से सामना करने को रहें तैयार नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया है जिसमें कोराना के समय लगाया गया लॉकडाउन फिर से याद दिलाया गया और युद्ध के तीन सप्ताह बाद प्रधानमंत्री जी ने इस युद्ध ने अभूतपूर्व आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय दबाव को पैदा कर दिया है और इस संकट के समय कुछ तत्व लाभ भी उठा सकते हैं उसके लिये कानून व्यवस्था से सम्बन्धित एजेंसियों को एलर्ट मोड पर रखा गया है। कुल मिलाकर बात यह है कि आज के दौर में इतना विकास कर लेने के बाद भी आज हम किसी भी आपदा व विपदा से निपटने के लायक नही बन सके हैं, वहीं इस धरती पर मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो वर्तमान में पूरी तरह से परजीवी हो चुका है बाकी इस धरा के अन्य सभी प्राणी आत्मनिर्भर है, चाहे गैस न मिले, चाहे नेटवर्क न रहे, चाहे पेट्रोलियम न मिले फिर वह अपना जीवन यापन कर ही लेंगे लेकिन परजीवी मानव के लिये आने वाले निकट भविष्य में संकट के बादल और भी गहरे हो सकते हैं, तभी तो पश्चिम ऐशिया संकट पर भारत देश की संसद से अपने प्रधानमंत्री जी ने 24 मार्च 2026 को आत्मनिर्भरता ही नागरिकों की समस्या का समाधान बताया है, साथ ही इसी बीच एक बड़ा कदम उठाने की बात कहते हुये कहा कि स्वदेशी जहाज तैयार करने में लगेंगे 70 हजार करोड रूपये यह बात एक अबूझ पहेली की तरह लग रही है जबकि एक दिन पहले प्रधानमंत्री जी ने आर्थिक और मानवीय दबाव पैदा करने की बात कहतें हैं वहीं दूसरे दिन 24 मार्च 2026 को आत्मनिर्भरता ही नागरिकों की समस्या का समाधान बताते हुए स्वदेशी जहाज बनाने में 70 हजार करोड रूपये खर्च करने की बात भी करते हैं।
- राज कुमार तिवारी “राज”
