मंच पर मुस्कुराता बचपन
नन्हे-नन्हे बच्चे आए,
मंच पे मिलकर मुस्कुराए।
रंग-बिरंगी लाइट जली,
खुशियों की फिर धुन चली।
नीली ड्रेस में गुड़िया प्यारी,
परी जैसी लगती न्यारी।
छोटे-छोटे कदम बढ़ाती,
सबको देख मुस्कुराती।
साथ खड़ा उसका प्यारा दोस्त,
हँसी में दोनों दिखते मस्त।
कभी इधर, कभी उधर दौड़ें,
मिलकर खुशियों के रंग जोड़ें।
दोनों देख-देख मुस्काये,
बचपन अपना रंग दिखाए।
हँसी-खुशी ये प्यारा पल,
याद रहेगा हर इक कल।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
