कविता

उत्कल दिवस – ओडिशा का गौरव

उत्कल की धरती पुकारे,
अपनी पहचान तुम जानो,
माटी कहती मर्म पहचानो,
अपने संस्कारों को मानो।
जहाँ समंदर गीत सुनाता,
नदियाँ जीवन गान सुनाएँ,

जगन्नाथ की पावन छाया,
हर मन में विश्वास जगाएँ।
वीरों की यह पावन भूमि,
बलिदानों की अमर कहानी,
हर कण में है शक्ति समाई,
हर श्वास में बसती रवानी।

उठो युवाओं, समय यही है,
अपने सपनों को आकार दो,
उत्कल की इस गौरव गाथा में,
अपना भी तुम अधिकार दो।

माटी का यह पावन संदेश—
“अपने मूल को कभी न भूलो”,
मेहनत, सत्य और साहस से,
जीवन के हर पथ को खोलो।

उत्कल दिवस का यह उत्सव,
हम सबको राह दिखाता है,
अपनी जड़ों से जुड़े रहो,
यही सच्चा सुख दिलाता है।

जय उत्कल, जय ओडिशा,
गूँजे हर दिल का यह नारा,
माटी की महिमा को समझो,
यही है जीवन का सहारा।

— डॉ. आकांक्षा रुपा चचरा

डॉ. आकांक्षा रूपा चचरा

शिक्षिका एवम् कवयित्री हिंदी विभाग मुख्याध्यक्ष, कवयित्री,समाज सेविका,लेखिका संस्थान- गुरू नानक पब्लिक स्कूल कटक ओडिशा राजेन्द्र नगर, मधुपटना कटक ओडिशा, भारत, पिन -753010