क्षणिका

क्षणिकाएं

1- भक्ष्य

सेना ने
शहर को ध्वस्त करके
सिद्ध किया लक्ष्य,
अब परजीवियों को
जश्न मनाने को
नहीं ढूंढना पड़ेगा भक्ष्य !

2- झंखा

गुलदान के फूल
झंखते है
कांटों का स्नेहभरा सहवास
और तितली की
मीठी गुफ्तेगू की प्यास।

3- विस्मय

बालक का विस्मय
आंख में लेकर
मैं ढूंढ रहा हूं
काले बादलों में
छिपा इन्द्रधनुष।

— पुष्करराय जोषी

पुष्करराय जोषी

पुष्करराय रेवाशंकर जोषी जन्म स्थल: राजुला (गुजरात) जन्म दिनांक:10/03/1955 शिक्षा:भी.कोम.;बी.एड गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी में लेखन अभी तक दस पुस्तक प्रकाशित गुजराती और हिन्दी पत्रिकाओं में कविता, लघुकथा,लेख प्रकाशित हो रहे हैं। अध्यात्म के यात्री होने से भौतिक प्राप्ति में रुचि नहीं है। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। पता: 479, गुजरात हाउसिंग बोर्ड, कणकोट पाटिया, कालावड रोड, राजकोट -360005 मो.नं.9925165164