क्षणिकाएं
1- भक्ष्य
सेना ने
शहर को ध्वस्त करके
सिद्ध किया लक्ष्य,
अब परजीवियों को
जश्न मनाने को
नहीं ढूंढना पड़ेगा भक्ष्य !
2- झंखा
गुलदान के फूल
झंखते है
कांटों का स्नेहभरा सहवास
और तितली की
मीठी गुफ्तेगू की प्यास।
3- विस्मय
बालक का विस्मय
आंख में लेकर
मैं ढूंढ रहा हूं
काले बादलों में
छिपा इन्द्रधनुष।
— पुष्करराय जोषी
