कविता पुष्करराय जोषी 06/05/202606/05/2026 0 Comments दर्पण दर्पण मेंक्या देख सकता है बिंब?केवल प्रतिबिंब,उसे क्या लेना-देना?वह तो दिखाता हैजैसा हो वैसा,वह न तो हैचेहरों का संग्रहालयकि न Read More
क्षणिका पुष्करराय जोषी 01/04/202601/04/2026 क्षणिकाएं 1- भक्ष्य सेना नेशहर को ध्वस्त करकेसिद्ध किया लक्ष्य,अब परजीवियों कोजश्न मनाने कोनहीं ढूंढना पड़ेगा भक्ष्य ! 2- झंखा गुलदान Read More