कविता

उत्तरदायित्व

सूरज होते भी
चारों ओर है घोर अंधेरा,
रात के वक्त रोशनी में भी अंधेरा !
खंडहर से दिल
और रेगिस्तान से चित्त में भी
कैसा जमाया है अंधेरे ने डेरा!
लाखों कोशिश हो रही है नाकामयाब,
कब पूरे होंगे रंगीन रक्त प्यासें ख्वाब?
फिर भी कुछ दिये
झंझा में भी जान हथेली पर रखकर,
जूझ रहे हैं अपना उत्तरदायित्व मानकर।

— पुष्करराय जोषी

पुष्करराय जोषी

पुष्करराय रेवाशंकर जोषी जन्म स्थल: राजुला (गुजरात) जन्म दिनांक:10/03/1955 शिक्षा:भी.कोम.;बी.एड गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी में लेखन अभी तक दस पुस्तक प्रकाशित गुजराती और हिन्दी पत्रिकाओं में कविता, लघुकथा,लेख प्रकाशित हो रहे हैं। अध्यात्म के यात्री होने से भौतिक प्राप्ति में रुचि नहीं है। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। पता: 479, गुजरात हाउसिंग बोर्ड, कणकोट पाटिया, कालावड रोड, राजकोट -360005 मो.नं.9925165164

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