प्रेम की धड़कन संजीवन है
पल-पल मिलना, पल-पल खिलना, पल-पल बिछड़न ही जीवन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
प्रेम है मरना, प्रेम है जीना।
प्रेम में चाहत बनती चीन्हा।
प्रेम है दर्पण, प्रेम है अर्पण,
विष पीकर, अमृत है दीना।
प्रेम नहीं उपहार में मिलता, भले ही भला कोई श्रीमन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
प्रेम में चाहत नहीं है हमको।
प्रेम की चाहत जग में सबको।
प्रेम पाने की वस्तु नहीं है,
खुद ही प्रेम करते हैं खुद को।
बाधाओं से लड़ हम बढ़ते, प्रेम का कण-कण नीमन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
अजस्र स्रोत है हिय में अपने।
नहीं देखने प्रेम के सपने।
नहीं प्रेम से रीते हैं हम,
निकले हैं हम प्रेम में तपने।
प्रेम के लिए नहीं, समय की सीमा, पल-पल प्रेम का सीजन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
