जीरो का सच
पेट्रोल पंप पर खड़े हुए आंखों में “भरोसा” भर लाते हैं,
मीटर पर ‘जीरो’ चमकते ही हम चैन की सांसें पाते हैं।
ये जीरो सिर्फ कहानी है, सच तो कुछ और भी होता है,
डेंसिटी के छोटे से खेल में कभी हक़ भी कहीं खोता है।
नज़र अटकी रहती अंकों पर दिल कहता सब ठीक है,
चालाकी की परतों में सच अक्सर बहुत कुछ सीख है।
बूंद-बूंद में फर्क छुपा है, जो आंखों से नहीं दिख पाता,
ईमान अगर थोड़ा भी डोले तो “ग्राहक” ही ठगा जाता।
इसलिए अब जागो थोड़ा, सिर्फ जीरो से खुश मत हो,
हक़ अपना पहचानो यारो, अब प्रश्न करो चुप मत हो।
सच की रोशनी साथ लिए हर भरवाई को देखो ध्यान,
ईमानदारी जब जीत जाएगी, तभी अपना देश महान।
(विशेष – डेंसिटी 720-775, जीरो से 1,2,3,4 देखों)
— संजय एम तराणेकर
