कविता

मौका मिल जाए अभी भी

मौका मिल जाए
अभी भी साधु बन जाऊंगा ।
सनम की बेवफाई
भजन समझकर गाऊंगा।।
मौका मिल जाए… 2
सनम की बेवफाई
भजन समझकर गाऊंगा ।।
सनम की बेवफाई… 2
मौका मिल जाए
अभी भी साधु बन जाऊंगा ।।

हरे राम… हरिराम… हरे राम…!
बेवफाई के रास्ते सभी बदनाम !!

कैसा चक्रव्यूह में फंसा हूँ,
कैसा दशा पा रहा हूँ ।
समय से पहले हुआ प्यार में
खुद को फंसा पा रहा हूँ ।।

मौका मिल जाए
अभी भी साधु बन जाऊंगा ।
सनम की बेवफाई
भजन समझ कर गाऊंगा ।।

बेवफा की बेवफाई में
जोड़ दिया विश्वास का डोर ।
मिलते मिलते टूट गया
घिस गया बंधन का डोर ।।

हरे राम… हरिराम… हरे राम…!
बेवफाई के रास्ते सभी बदनाम !!

बेवफाई का पोल खुल गया
प्यार का क्या मोल ।
बर्बादी के पथ पर चल पड़ा
ये जीवन अनमोल ।।

जीवन भर पछतावा
उन्हीं का पाता रहूंगा ।
मौका मिल जाए
अभी भी साधु बन जाऊंगा ।
सनम की बेवफाई
भजन समझ कर गाऊंगा ।।।।

— मनोज शाह ‘मानस’

मनोज शाह 'मानस'

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