तुम सहज प्रकृति हो
तुम सहज प्रकृति होजीने की महज़ आकृति हो हिमालय की गोद से मचलती मस्त पवन निर्मल ।नभ के गर्भ से
Read Moreतुम सहज प्रकृति होजीने की महज़ आकृति हो हिमालय की गोद से मचलती मस्त पवन निर्मल ।नभ के गर्भ से
Read Moreमौका मिल जाएअभी भी साधु बन जाऊंगा ।सनम की बेवफाईभजन समझकर गाऊंगा।।मौका मिल जाए… 2सनम की बेवफाईभजन समझकर गाऊंगा ।।सनम
Read Moreवक्त तो लगता है!बरसों लगता हैएक बालक कोपालन पोषण जवान होने में!! महीनों लगता हैएक बीज कोअंकुरित होने मेंपते कलियां
Read Moreजब चाहो प्यार प्रिय मेरे पास चले आना तुम ।होकर निशंक मेरे मन का द्वार खटखटाना तुम ।तन कलुषित है
Read Moreमकड़ियां खाते हैंजन्मते ही…,जन्म देने वाले को भीखा जाते हैं…खाने के लिए ही जन्मा है येमकड़ियां खाते रहते हैं… मन
Read Moreकितने युद्ध मंथनकितने क्रूर लांछनकितने क्षणिककितने लाक्षणिकहै तुम्हारा ठहराव! आना जाना तो हैजगत का रीतदंगल, हल्ला बोल,बवाल चुनाव मेंगया साल
Read Moreगुज़रकर जो चला गया वक्तबहती हुई नदियों की तरहएक रफ्तार सेतीव्र वेग सेगुज़र जाता है…! हर बात क्षणिक जैसाक्षण भंगुर
Read Moreमेरे शब्दों की आवाज़गूँजेंगी ज़हन में तुम्हारे…मेरे जाने के बाद कोरे पन्नों पर लिखीजो दास्तान हमारीपढ़ी जायेगी एक दिन…मेरे जाने
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