तुम्हारी यादें भी
मकड़ियां खाते हैंजन्मते ही…,जन्म देने वाले को भीखा जाते हैं…खाने के लिए ही जन्मा है येमकड़ियां खाते रहते हैं… मन
Read Moreमकड़ियां खाते हैंजन्मते ही…,जन्म देने वाले को भीखा जाते हैं…खाने के लिए ही जन्मा है येमकड़ियां खाते रहते हैं… मन
Read Moreकितने युद्ध मंथनकितने क्रूर लांछनकितने क्षणिककितने लाक्षणिकहै तुम्हारा ठहराव! आना जाना तो हैजगत का रीतदंगल, हल्ला बोल,बवाल चुनाव मेंगया साल
Read Moreगुज़रकर जो चला गया वक्तबहती हुई नदियों की तरहएक रफ्तार सेतीव्र वेग सेगुज़र जाता है…! हर बात क्षणिक जैसाक्षण भंगुर
Read Moreमेरे शब्दों की आवाज़गूँजेंगी ज़हन में तुम्हारे…मेरे जाने के बाद कोरे पन्नों पर लिखीजो दास्तान हमारीपढ़ी जायेगी एक दिन…मेरे जाने
Read Moreझुण्ड झुण्ड में बंटा हुआ हैटुकड़ा टुकड़ा में बंटा हुआ हैजहां में जहां तक की बातेंअर्थात…,संसार की यावत् की बातें…!
Read Moreअभी-अभीधरती पर कदम रखाएक हाड़ मांसजान प्राण का टुकड़ाबालक को हाथों में लेकरबड़ी दुलार सेबहुत ही प्यार सेहसरत भरी निगाहों
Read Moreएक विद्वान ने सुबह-सुबह चाय पिया और कहा…, ‘रात हो चुका है…!’ लोगों ने सोचा…, उन्होंने कहा है तो सत्य
Read Moreबहुत देखा हूं…,संसार को जानने के लिएचला मुसाफिर भीवापस आए स्वयं को भूलाकर ! गुलशन में गएगुल और खुशबू के
Read Moreदूर से…,चांद को देखता रहामगर… पा ना सका…! गुरुर से…,आसमान को निहारता रहामगर… कभी छू न सका…! सुरूर से…,हवा को
Read Moreबेपरवाह भीतर के मंजर । लापरवाह भीतर के डर ।। मन भीतर के आकृति । दर्द भीतर के संतुष्टि ।।
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