कविता

बजरंगी

शीश झुकाते हम बजरंगी।
मान रहे हम साथी संगी।।
भूत-प्रेत बाधा के मारे।
आप सभी को सदा उबारे।।

राम प्रभु के भक्त प्रिये हो।
छवि राम निज हृदय लिये हो।।
हम तो कहें आप बजरंगी।
लीला करते अनुपम रंगी।।

सुमिरन करें नित्य हनुमाना।
राम कृपा जीवन में जाना।।
जगत आपकी महिमा जाने।
लगता हम हो गये सयाने।।

सीता माँ का पता लगाए।
लक्ष्मण जी के प्राण बचाए।।
दर्शन सफल राम का होता।
अनुमति पहले तुमसे लेता।।

विघ्न विनाशक नाम तुम्हारा।
संकट में बस एक सहारा।।
जीवित देव आज भी स्वामी।
करते मनुज नमामि नमामी।।

*सुधीर श्रीवास्तव

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