हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य – अपनी-अपनी नाक

चौधरी रामलखन एक नाक वाले व्यक्ति हैं। नाक को बचाकर रखते हैं। नाक एक सामाजिक ताकत देता है। नाक कटना जीवन को खत्म करने के बराबर मानते हैं। जिसकी नाक कट जाये तो रामलखन उसे मरा हुआ मान लेते हैं।

कुछ समाज में बड़ी नाक वाले होते हैं। उनका अलग रुतबा होता है। वे बड़ी नाक वाले के साथ उठना बैठना रखते हैं। एक अपना सामाजिक गौरव मानते हैं। रामलखन की भी नाक ऊंची है। जिसकी नाक थोड़ी भी कट जाती तो रामलखन उसे हेय दृष्टि से देखते और उसके प्रति कटुवचन दो-चार शब्द बोल देते।

सज्जन की बिटिया ने प्रेम विवाह कर लिया। सज्जन बहुत गरीब थे। उतनी ऊंची नाकवाले नहीं थे। पिता के हालातों को देखकर सज्जन की बिटिया पिता की अनुमति से बिन दहेज के एक युवक से प्रेम विवाह कर लिया।

इस बात को सुनकर रामलखन ने सज्जन से कहा कि तुम्हारी बिटिया नाक कटा दी। तुम्हारी नाक कट गयी सज्जन। तुम जीने के लायक नहीं रहे। सामाजिक रुतबा कम कर दी। मेरी बेटी मेरी नाक सबसे उपर रखती हैं। मेरी बेटी मेरी मर्जी के बगैर कुछ नहीं कर सकती।

रामलखन को अपनी ऊंची नाक पर विशेष गर्व रहता है। जिस कारण अपनी नाक में देशी घी लगाकर पूरे मोहल्ले में सज्जन की बुराई की। सज्जन की बेटी जैसी मेरी बेटी नहीं है। मैं नाकवाला हूँ। मेरी नाक ही मेरी इज्जत है।

अचानक फोन पर सूचना मिली की आपकी बेटी किसी युवक के साथ भागकर शादी कर ली है। चौधरी रामलखन ने धीरे से अपनी नाक को छुआ और उन्हें अंदाजा हो गया कि मेरी नाक कटकर छोटी हो गयी है।

चौधरी साहब के सामने बैठा सज्जन अपनी नाक में देशी घी लगाने लगा और बोला- चौधरी साहब आज मुझे महसूस हो रहा है कि मेरी नाक आपसे ऊंची नाक लग रही है। चौधरी साहब की नजरें झुक गयी। बोले-अब मत शर्मिंदा करो सज्जन भाई। सबकी अपनी अपनी नाक होती है।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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