कुण्डली/छंद

सुखद तराने

जोता खेत हलधर हौले हैं।

बोता बीज फसल डोले हैं।।

दाता   हर्षित मन  फूले  हैं।

फूलों  संग  पवन  झूले  हैं।।

मोती सी दमक रहीं बाली।

पाएगा हिय खुशियाँ माली।।

प्यासे को सुख मिल जाएगा।

भूखा  शांति  सुभग पाएगा।।

बूँदे  बादल  बरसाएंगे।

खेतों  नेह  छलकाएंगे।।

नैना हो हरपल संतोषी।

माटी जीवन हरखे पोषी।।

माँ आशीष  हृदय  आनंदी।

गूँजे  गीत  सरस स्वच्छंदी।।

मीठे  बोल  हिय लुभाने  हैं।

माता भक्ति सुखद तराने है।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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