कुण्डली/छंद *चंचल जैन 12/04/202612/04/2026 0 Comments चाहे शांति सकल संसारी। हिंसा से भय दुख दोधारी।। रौद्रा रूप भभक फैलाता । स्वाहा सौख्य महज रूलाता।।