हास्य-व्यंग्य : घूस की महिमा
सरकार ने एक नंबर जारी किया कि जो घूस मांगता है उसकी इस नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मैनालाल नंबर पाकर गदगद हो गये। बिगड़ा काम जल्द हो जायेगा। दारोगा जी को नाको चना चबवा दूंगा। मेरा एफआईआर दर्ज करने के लिए घूस मांग रहा है।
मैनालाल बहुत खुश थे। विपक्षी को अब पता चलेगा कि मेरी पहूँच बहुत दूर तक है। घूस एक पाई नहीं दूंगा। एक रुपया मेहनत से आता है। दारोगा जी के पसीने छूट जायेंगे। नानी की याद आ जायेगी कि किस आदमी से पाला पड़ गया।
मैनालाल ने घूस लेने वाले दारोगा जी की शिकायत किया कि बिना घूस एफआईआर नहीं दर्ज कर रहे हैं। रुपये पेड़ में थोड़ी फलते हैं। साहब गरीब आदमी पर दया कीजिये। मैनालाल को बताया गया कि दारोगा जी को एक मिनट में हवालात में बंद कर दिया जायेगा। इनको मुफ्त में हवा और लात मिलेगी।
बेचारे के चेहरे पर मुस्कान थिरक गयी। सौ वाट का बल्ब चेहरे पर जल गया कि मैनालाल का काम हो जायेगा। बताया गया कि खर्चा लगेगा। बस सारा काम निपटा देंगे।
मैनालाल का माथा ठनका। दारोगा जी तो मामा ही थे। घूस निपटान केन्द्र तो उसके दादा निकले।
जगह-जगह से दबाव बनाने के लिए इस आफिस से उस आफिस तक। चक्कर पे चक्कर। भागदौड़ में कोई कमी नहीं। हर जगह से दबाव के लिए खर्चा- बर्चा की मांग की गयी। बहुत दौड़ लगाया। चप्पल घिस गयी। आंखों की रोशनी चली गयी। पोपला मुंह हो गया। दांत सारे झड गये। बालों में सफेदी आ गयी। कोई सुनवाई नहीं हुई।
घूस की महिमा के कारण बेचारे चढ़ावा नहीं चढ़ा सके। घूस पे घूस। घूस से छुटकारा दिलाने वाले को घूस। एफआईआर दर्ज नही हो सकी। एक जिंदगी बीत गयी। घूस न देने के कारण मैनालाल बेचारे का एफआईआर दर्ज नही हो सकी।
— जयचन्द प्रजापति “जय’
