नन्हा सीख रहा है
नन्हा सा बच्चा बैठा कार में,
किताब लिए है अपने हाथ में।
चित्रों की दुनिया रंग-बिरंगी,
खोया है वो मीठी बात में।
फूलों को उंगली से छूता,
फलों के नाम भी दोहराता।
धीरे-धीरे सीख रहा है,
हर रंग को दिल से अपनाता।
केला, सेब और आम दिखे,
खुश होकर उनको पहचानता।
गुलाब, सूरजमुखी देखे,
मुस्काकर सिर हिलाता।
नन्हीं-सी ये प्यारी पढ़ाई,
खेल-खेल में ज्ञान सिखाए।
आज जो अक्षर पहचान रहा,
कल दुनिया को समझ पाए।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
