अक्षय तृतीया (कुंडलिया छंद)
आई शुभ बैशाख में, पावन अक्षय तीज।
तिथि अति महत्वपूर्ण ये, कहते आखातीज।।
कहते आखातीज, पुण्य कर्मों का मेला।
दान-धर्म की तीज, कटें दु:खों का रेला।।
सत्य कहे आनंद, घड़ी अक्षय सुख लाई।
पुण्यों का हो लाभ, तीज अद्वितीय आई।। (1)
मंगलकारी ये घड़ी, है वरदानी साज।
नूतन गृह प्रवेश करें, विवाह शुभादि काज।
विवाह शुभादि काज, खरीदें चॉंदी-सोना।
व्यापार प्रगतिशील, समृद्धशाली सलोना।।
सत्य कहे आनंद, खास मुहूर्त शुभकारी।
बढ़ता हैं सौभाग्य, तीज ये मंगलकारी।। (2)
अक्षय सुख पाजाइए, खुशियों से भरपूर।
लक्ष्मी जी की हो कृपा, मुखमंडल पर नूर ।।
मुखमंडल पर नूर, बढे़ व्यापार मुनाफा।
प्रतिदिन पाए आप, दुआओं भरा लिफाफा।।
सत्य कहे आनंद, करें सब पापों का क्षय।
शुद्ध भाव सत्कर्म, तीज फलदाई अक्षय।। (3)
— मोनिका डागा “आनंद”
