जैसे भी हो नाम चाहिए
जैसे भी हो नाम चाहिए।
बस हमको आराम चाहिए।।
बदनामी की नहीं है चिंता,
हमको केवल दाम चाहिए।
खेल स्वार्थ का खेल सके हम,
बस ऐसा आयाम चाहिए।
गर्मी ठंडी या हो वारिश,
खाँसी नहीं जुकाम चाहिए।
बिना किए सब कुछ मिल जाए,
ऐसा पावन धाम चाहिए।
जीवन से अब मोह नहीं है,
हमें मुक्ति का धाम चाहिए।
मरने से डर लगे भला क्यों,
इंद्रासन निज नाम चाहिए।
