उपहार
आज रिमी का जन्मदिन दिन है। सुबह से ही उसकी सहेलियां उसे फोन कर रही हैं लेकिन उसका फोन बंद बता रहा है।हार कर सभी सहेलियों ने आपस में फोन लगाना शुरु कर दिया। सभी आपस में एक दूसरे से यही पूछने लगे “रिमी से तेरी बात हुई क्या,पता नहीं क्यों उसका फोन बंद बता रहा है। किसी ने सलाह दी,उसका और कोई नंबर हो तो ट्राई करो।
रिमी ने आज सुबह से ही अपने आप को गेस्ट रूम में बंद कर लिया। परिवार में उसके पति,सास,दो बेटी,एक बेटा हैं। उसने सुबह ही सबसे कह दिया”आज रात तक मुझ से कोई बात ना करें।मुझ से किसी भी तरह के काम की उम्मीद ना रखे।आज के खाने का इंतजाम भी आप लोग जैसा चाहें कर लें और प्लीज़ मुझे डिस्टर्ब ना करें। उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।घर पर मानो मरघट जैसा सन्नाटा छा गया। परिवार के लोग बारी बारी से आकर दरवाजा खटखटा कर चले गये। लेकिन
रिमी ने किसी को कोई जवाब नही दिया। रिमी के पति ने समझा ऐसे ही कुछ समय का मज़ाक़ होगा और वह आफिस चले गये। बच्चों ने अपने पापा को फोन कर बताया।वह मन ही मन घबराय तो सही पर उन्हें पूरा भरोसा था कि रिमी ऐसा वैसा कोई काम नहीं करेगी।फिर भी
वे भी घबरा गए। आखिर में उसकी सास ने दरवाजा खटखटाया बोली बहू,ये क्या मज़ाक़ है ,तुम ऐसा क्योंकर रही हो।तो रिमी ने कहा मां जी आप सब आराम से रहिए। मैं भी आराम से हूं और मैं ने आप सब से कहा है ना बस, आज रात तक की ही बात है।उसके बाद किसी की भी हिम्मत नहीं हुई दरवाजे तक जाने की ।धीरे धीरे शाम हो गई। रिमी के पति भी घर आ गए।
वे सीधे गेस्ट रूम के दरवाजे के पास गए और कहने लगे यार, रिमी अब ,बस भी करो, आखिर तुम कर क्या रही हो।सुबह से शाम हो गई।ना तुमने कुछ खाया ना ही पीया।देखो,अब भी तुमने दरवाज़ा नही खोला ,तो मुझे दरवाजा तोड़ना पड़ेगा।खट की आवाज के साथ दरवाजा खुला और रिमी का रुप देखकर सब दंग रह गए। बालों का सुंदर सा जुड़ा, गालों पर गिरी लटें,चेहरे पर बहुत ही हल्का सा सलीके से किया गया मेकअप,कलाई पर रंगीन चूड़ियां और गाजरी रंग की साड़ी में वह बहुत ही सुन्दर लग रही थी।
कमरे से बाहर आते ही उसने अपनी सास और पति के पैर छूकर कहा आज मेरा जन्मदिन है। तभी बच्चों ने उससे लिपट कर कहा वो तो हम को याद है मम्मा, पर सुबह से ही आपके इस तामझाम को देखकर हम सब कुछ भूल गए। रिमी के पति ने कहा आज तुमको ये क्या हो गया। तुम ने ऐसा क्यों किया।
आखिर तुमको क्या मिला ऐसा करके। रिमी खिलखिला कर हंस पड़ी और कहने लगी
आज मैंने ही खुद को जन्मदिन का खास उपहार दिया।आज ना ही किसी का फोन काॅल,
ना ही खाना पकाना,ना ही आपका टिफिन।
आज मैंने दिन भर अपने मन का काम किया।अपनी डायरी पर कुछ कविताएं लिखी
अपने चेहरे पर फेस मास्क लगाएं, बालों को डाई किया और फिर नहाकर तैयार हुई।एक बहू, एक पत्नी और मां होने के नाते मुझे सारे काम करने से कोई एतराज़ नहीं, लेकिन खुद के जन्मदिन पर भी मैं इतनी व्यस्त हो जाती हूं कि अपने मन का करना का समय सोच सोचकर निकालना पड़ता है।आज मुझे कोई उपहार मिले ना मिले पर मैंने खुद जो सुकून का उपहार दिया है वह मेरे लिए बहुत किमती है।
रिमी की इस बात से सभी हैरान रह गए।तभी रिमी की सास ने कहा बहू आज रात का खाना मैं बनाऊंगी वो भी तेरी पसंद का।तभी बच्चों ने कहा आज हम बाहर खाना खा कर मम्मा का स्पेशल बर्थ डे सेलिब्रेट करेंगे।सभी कार पर बैठ गए। रास्ते में रिमी के पति ने पूछा “ये बताओ कि तुमने दिन भर कुछ नहीं खाया तुम्हें भूख नहीं लगी।”रिमी ने मुस्कुरा कर कहा क्यों, आपके लिए करवा चौथ का व्रत रखती हूं तो भूख लगती है क्या, ऐसे ही अपने लिए भी व्रत रखा, समझ लो।और व्रत कभी खाली नहीं जाते,देखा कितना अच्छा फल मिला उसका।सभी हंस पड़े।
— अमृता राजेंद्र प्रसाद
