आज फिर
आज फिर सोशल मीडिया पर
पृथ्वी बचाने की मुहिम छिड़ी,
स्टेटस बदले, तस्वीरें डलीं, बातें बड़ी-बड़ी लिखी गईं।
किसी ने पेड़ लगाया पोस्ट में,
तो किसी ने नदियों पर कविता कही।
हैशटैगों में हरियाली छाई,
पर धरती फिर भी प्यासे मन से मुस्काई।
क्योंकि असल लड़ाई स्क्रीन के उस पार है,
जहाँ आदतें बदलना सबसे बड़ा विचार है।
कागज़ कम, प्लास्टिक कम,
ये बातें भी अब ट्रेंड बन गई हैं,
पर क्या सच में हम बदले हैं,
या बस बातें ही चल गई हैं?
धरती माँ को शब्द नहीं,
थोड़ा सा व्यवहार चाहिए,
पोस्ट नहीं, एक छोटा कदम,
बस इतना सा प्यार चाहिए।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
