लोकतंत्र की आहुति
चुनाव में कोई हारा है और कोई है जीता,
लोकतंत्र की आहुति में योगदान दें सीखा।
झालमुड़ी का ‘करिश्मा’ नहीं रहा हैं फीका,
खाई किस-किसने, लगे किसी को तीखा।
यहाँ हर कदम पर ‘भय’ का था वातावरण,
महिलाओं ने बेधड़क किया मतदान वरण।
जिसने दिया भयमुक्त करने का आश्वासन,
वहीं पाएगा कुर्सी, राज्य में अपना शासन।
यूं जनता ने अपना भी फैसला लिख दिया,
निराश न जाने किस-किसको कहाँ किया।
किसी के नेतृत्व ने हारने का रेकार्ड बनाया,
विजय देखों ‘वन टाइम’ इतिहास लिखाया।
यहाँ पे निराश मैंने किसी को भी नहीं किया,
हिमंता को पुनः विकास का जिम्मा दे दिया।
विपक्षी को प्रसाद में केरलम ‘उपहार’ दिया,
वोट की ताकत ने रंग दिखा सबको रिझाया।
— संजय एम तराणेकर
