हास्य व्यंग्य

चुनाव जीते नेताजी के तेवर

नेताजी चुनाव जीत गये। समर्थकों ने माला पहनाया और नेताजी को देशी घी का लड्डू खिलाया। नेताजी गदगद हो गये। बड़ी तरावट महसूस किये। दिल को ठंडई पहुंची। ऐसा मतदाताओं पर ब्रह्मस्त्र छोड़ा कि विपक्षी के मतदाता  हमारी तरफ सरक लिये। 

बड़ा दांवपेंच वाला बनता था। एक भी चाल कामयाब नहीं हो पायी। चुनावी वादे का ऐसा पासा फेंका कि जनता ने तो सिर पर ताज पहना दिया। कौन सा वादा पूरा करना है। पांच साल तो मौज की जिंदगी होगी। फाइवस्टार होटलों में जश्ने बहार होगा। 

अब फटा कुर्ता पायजामा तो नहीं पहनना पड़ेगा। बीबी के सपने में जान डाल देंगे। मुनीम जी का कर्जा वापस कर देंगे। ईश्वर की कृपा होगी तो दो-चार फ्लैट का मालिक हो जायेंगे। दो-तीन फोर ह्वीलर निकाल ही लेंगे। सपना था एक आलीशान महल बनाने का। राजशाही ठाठ-बाट होगी। जिंदगी में बहुत पापडु बेले हैं। 

कागजी हेराफेरी का मामला है, कौन सी जांच होगी? कल्याणकारी योजनाओं को सीधा गटक लेंगे। कुछ जहाँ आला अधिकारियों को जेब में डाला। चुटकी बजाकर जनता के पैसे को काला से सफेद करने में माहिर हूँ। स्कूल के दिनों में बहुत दोस्तों का पैसा चुराकर अपना बताने का गुण रखता हूँ। 

अपनी वाहवाही के लिए मीडिया जिंदाबाद है ही। जनता को दिखाने के लिए दो-चार छोटा-मोटा काम करा दूंगा। पांच साल तक गोदी मीडिया की गोंद में बैठकर बैतरणी नदी पार ही कर जाऊंगा। पैसे तथ झूठ के बल पर मीडिया की सुर्खियों में रहेंगे। अखबारों की मुख्य हेडलाइन्स में रहेंगे। 

एक ही काम को अलग-अलग नाम देकर फर्जी तरीके से चैनलों पर चलवाते रहेंगे। जनता का भी सुपरस्टार हीरो बनें रहेंगे। जनता परेशान रहेगी तभी अगली बार पुनः सत्ता मिलने के चांस रहेंगे। जनता अपनी परेशानी तथा वोट दोनों लेकर मेरे पास आयेंगे। राजनीति का दूसरा नाम ही है कि बेटे को बाप पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए। 

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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